हमारे प्रेम का अख़बार

तुमने मुझसे इतनी अजीब और विचित्र बातें की हैं, जो मुझसे पहले कभी किसी ने नहीं कीं। ऐसी बातें कही हैं, जो शायद किसी ने कभी कही भी नहीं। मैं अब तक हतप्रभ हूँ, अपनी ज़बान पर भी और हमारे बीच के इस अजीब संवाद के संवाददाता पर भी, जो हर बार न जाने कहाँ से नई ख़बर ले आता है।
जो लोग तुम्हारा दैनिक अख़बार पढ़ते होंगे, उन्हें हमारी बातचीत से इतने नए तथ्य मिलेंगे, इतनी अनोखी ख़बरें मिलेंगी कि वे उन्हें सुबह की चाय के साथ भी हज़म नहीं कर पाएँगे।

मैंने इतने शब्दों से तुम्हारा श्रृंगार किया है कि अब लगता है मेरे पास शब्दों का अपना कोई निजी शब्दकोश नहीं बचा। सारे अच्छे विशेषण तुम्हारे नाम के आगे छप चुके हैं। अब नए शब्दों के लिए मुझे दूसरी भाषाओं के अख़बार पढ़ने पड़ रहे हैं, कहीं कोई ऐसा शब्द मिल जाए जिसे तुम्हारे नाम के साथ पहली बार प्रकाशित किया जा सके।
अच्छा, ऐसा करो, मेरे सारे प्रेमपत्रों और मेरी कहानियों के सारे पात्रों को अपने दैनिक अख़बार में प्रकाशित करवा दो। उन्हें गली के आख़िरी मकान तक बँटवा देना। पहले पन्ने पर हमारी बातचीत की सबसे बड़ी सुर्ख़ी लगाना और अंदर के पन्नों पर वे सारी छोटी-बड़ी ख़बरें छाप देना जिन्हें हमने कभी किसी और से नहीं कहा।

फिर देखना, लोग सुबह की चाय भूलकर हमारी ख़बरें पढ़ेंगे। कोई हमारी बातचीत पर संपादकीय लिखेगा, कोई उस पर आपत्ति दर्ज करेगा, कोई तथ्य-जाँच के नाम पर हमारे प्रेम की पड़ताल करेगा और कोई यह हिसाब लगाने बैठेगा कि आख़िर दो लोगों के बीच इतनी बातें हुईं कैसे। कुछ लोग इसे ख़बर मानेंगे, कुछ अफ़वाह और कुछ शायद इसे प्रेम कहकर अख़बार के साहित्यिक पन्ने पर भेज देंगे।

तुम्हारे लिखे हुए सारे प्रेमपत्र मैंने किताबों के बीच रखकर सँजो रखे हैं। मेरे लिए वे अब पत्र नहीं, पुराने अख़बारों की तरह हैं, हर पन्ने पर एक बीता हुआ दिन, हर तारीख़ के नीचे कोई छोटी-सी घटना, और हर ख़बर के पीछे हम दोनों।
अच्छा, मुझे कुछ प्रेमपत्र लिख भी भेजना। अख़बार के बारे में ही सही। मुझे बताना कि आज की सबसे बड़ी सुर्ख़ी क्या है, किस ख़बर ने तुम्हें सबसे ज़्यादा परेशान किया, किस कॉलम में मेरा ज़िक्र आया और किस पन्ने पर तुमने चुपके से मेरे लिए कोई ऐसी बात लिख दी जिसे सिर्फ़ मैं पढ़ सकूँ।

बाक़ी, हमारी ख़बर को बहुत गंभीर मत बनाना। उसे पहले पन्ने से उठाकर धीरे-धीरे साहित्यिक परिशिष्ट तक ले जाना। सिर्फ़ तुम लिखना।और अगली सुबह अख़बार मेरी खिड़की के नीचे डाल देना।मैं चाय बाद में पी लूँगी।
दिशा 🌻

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