पतंग हमेशा से भाती थी। बचपन में पापा के ऑफिस से आ जाने से पहले, मतलब तक़रीबन पाँच से छह बजे के बीच, अगल बगल के कई बच्चे अपनी अपनी छत पे एक सफेद रेशमी डोर पकड़े लाल पीली हरे रंगों की पतंग आकाश में लहरा रहे होते थे। उन पतंगों पे अलग अलग तरह की सुंदर तस्वीरें बनी थीं। कहीं पे कोई आने वाली नई पिक्चर की झलक, कहीं पे मेरा सबसे पसंदीदा कार्टून टॉम एंड जेरी, कहीं पे कोई शेरों शायरियां तो कहीं पे चुटकुले। क्या सुंदर दृश्य हुआ करता है। आज भी हुबहू याद है। और उन सबमे सबसे सुंदर वो नीली पतंग! हवा के वेज से लहराती, ना गिरती ना कटती, अपनी छोर पे गोटे टांगे, पूरी आसमान के रंग की, आसमान की ही तरह, आसमान की परी जैसी वो नीली पतंग! मैं दसों पतंगों में बस उसी को निहारती रहती थी। रोज़ अपनी दिनचर्या के हिसाब से शाम पाँच से छह बजे तक आसमान की सैर करती। सभी पतंगें उसे काटने को आतुर रहतीं, मजाल है वो किसी के हाथ आए। लंबे पेड़ उसे बस हवा देते, उसका बिगाड़ तो कोई कुछ नहीं पता था।
इक शाम की कहानी है। मैं छत पे खड़ी अपने बाल संवार रही थी पर मेरी नज़रें आसमान में उड़ती उन सभी पतंगों में बस अपनी नीली पतंग को निहारने में गुम थीं। मुझे वो हवा में डोलती, उसके वेग में मचलती बहुत मनमोहक लग रही थी। उस दिन मौसम थोड़ा विपरीत था। हवा तेज़ थी जो आंधी का रूप ले चुकी थी। आसमान का श्रृंगार ख़राब हो रहा था, सारी पतंगें इधर उधर लड़ कर या गिर रही थीं या कहीं फँस कर अपना अंतिम संस्कार कर रही थीं।
मैं भी नीचे जाने की तैयारी में थी। बाल बाँधे, चप्पल पहनी, कान से इयरफोन्स निकाले और पीछे मुड़ी। पीछे शेड के बगल में कोई झाँक रहा था। मैंने ध्यान से देखा तो वो वही नीली पतंग थी। मेरी नीली पतंग।
दौड़ के मैंने उसको अपनी गोद में उठा लिया। गले से लगा लिया।मैंने उसको जी भर के निहारा। उस आँधी में मैं छत पे खड़ी एक पतंग को ऐसे निहार रही थी जैसे कोई प्रेम पत्र हो।
अब मेरे पास दो विकल्प थे। मैं आराम से उसे लेकर नीचे ले जा अपने ड्राइंग रूम में सजा उसे दिन रात बैठ निहार सकती थी।या छोड़ सकती थी उसको। जाने दे सकती थी उसको उसके आसमान के पास।
मैंने दो पल सोचा। इतना काफ़ी था। मैं निर्णय कर चुकी थी। मैं ज़ोर से भागी और अपनी पूरी ताक़त से अपनी सबसे पसंदीदा नीली पतंग को आसमान की तरफ़ उछाल दिया। उसका माँझा कसा। वो उड़ने लगी, वो आंधी में अपने तूफ़ान से उड़ने लगी। मेरी नीली पतंग, अपने आसमान का श्रृंगार करते मुझे देख मुस्कुरा रही थी।
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