पूर्णतः आज़ादी के लिए
उकताना कितना ज़रूरी है।
मैं उस खोखली सभ्यता का
हिस्सा हूँ
जहाँ मुझे लोगों की फ़िकर है
तालियाँ मुझे उकसा रही हैं
तारीफ़ें मुझे चढ़ा रही हैं
आज दो चार लोग हैं ज़रूरी
हाथ मिलाना है मजबूरी
मैं बैरागी
मुझे नमाज़ में
अपनी आज़ादी पढ़नी है।
आज़ाद होने की
दीर्घ प्रक्रिया में
उकताना
मेरा तीसरा चरण है।
दिशा 🌻
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