सूरजमुखी भी लगाते हैं

कल तुम्हारे लिए फूल ख़रीदे थे। तुम्हारे काले गलाबंद के लिए ख़रीदे थे मतलब। तुम्हरे लिए मैं क्या ही ख़रीद पाऊँगी? गलाबंद के लिए ख़रीद सकती हूँ।दरअसल, जब तुम अपना काले रंग का बंद गाला अपनी चुनरदार पगड़ी के साथ पहनते हो तो तुम प्रिज्म(आयत) के समान बर्ताव करने लगते हो। जैसे सूरज की सफेद किरन तुमपर पड़ी और तुम इंद्रधनुष के सातों रंगों में बिखर गए। बस उसी पर अपने हाथों से एक सूरजमुखी चढ़ाना चाहती थी। छोटा सा मगर सुंदर सा। अब जितना मैं तुम्हें और तुम्हारे दिमाग़ को जानती हूँ तुम एक ही बात कहोगे, की “गलाबंद पे सूरजमुखी कौन लगाता है? गुलाब लगाते हैं वहाँ!” इतना कह कर तुम जल्दी जल्दी आईने की तरह मुह फेर, अपने पहले से काढ़े बालों को काढ़ने लगोगे। फिर मैं भी ठीक तुम्हारे पीछे एक छोटा सा पीढ़ा लेकर आऊँगी। उसपे चढ़ूँगी।तुम्हें आवाज़ दूँगी, तुम पलटोगे और मैं अपना सूरजमुखी तुम्हारे क़ीमती गलाबंद को बचाते हुए तुम्हारे जेब में धीरे धीरे खोसूँगी। मेरे बाल तुम्हारी आँखों पे आ रहे होंगे। फिर भी तुम मेरी आँखों को देख रहे होगे। मैं सूरजमुखी को आधे से ज़्यादा अंदर खोंस कर तुम्हारी मेरी तरफ़ एक टक देखती आँखों को हक़ से निहारूँगी और तुम्हारे कान की तरफ़ धीरे से बढ़ूँगी। एक लंबी गहरी साँस लूँगी, मुस्कुराऊँगी और सरगोशी से कहूँगी “अब से, आज से सूरजमुखी भी लगाते हैं।”

दिशा 🌻🌻

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