लिखने को कितना कुछ है।हर दिन मेरे आसपास कोई न कोई कहानी जन्म लेती है। कोई रिश्ता टूटता है, कोई उम्मीद बनती है, कोई सपना अपनी ही राख में बैठा अगली सुबह का इंतज़ार करता है। और मैं, अपनी ही नाकामियों में मुग्ध, उन्हें हार नहीं, बुलंदियों की सीढ़ियाँ समझकर जोड़ती चली जाती हूँ।ज़िन्दगी कभी रुककर नहीं घटती। वह तो परिस्थितियों के बहाने रोज़ अपना चेहरा बदलती रहती है। एक बैग, कुछ किताबें, कुछ कपड़े, और फिर सब बदल जाता है। नई जगह, नए लोग, नई फ़ाइलें, नए दस्तावेज़, नई ज़िम्मेदारियाँ। जैसे किसी ने पिछला अध्याय बिना विदा कहे बंद कर दिया हो।ठहराव हमें कभी दिया नहीं जाता; उसे धरती खोदकर निकालना पड़ता है। और अक्सर जब तक वह मिलता है, हम फिर किसी और सफ़र के लिए देर कर चुके होते हैं।
आगे बढ़ना ही मनुष्य का सबसे बड़ा अभिशाप भी है और सबसे बड़ी मुक्ति भी।
इश्क़ में आगे बढ़ना पड़ता है।
काम में भी।
नाकामियों में भी।
धूप में, बरसात में।
शायद जुलाई इसी का नाम है। आगे पढ़ने का, आगे बढ़ने का। जैसे किताब का कोई ऐसा अध्याय जिसे पढ़ना मन नहीं करता, फिर भी पलट देना पड़ता है, क्योंकि कहानी किसी एक पन्ने पर हमेशा के लिए नहीं ठहरती।
मुझे चलना अच्छे से आता है। मैं वक़्त की चादर ओढ़ लेती हूँ और उसकी सुइयों से पड़ी सलवटों को चुपचाप समेटती चल देती हूँ। पीछे छूट जाती हैं कुछ रातें, इतनी ख़ामोश कि उनमें अपनी ही साँसें परायी लगने लगें। कुछ चेहरे, जो अब नाम से ज़्यादा एहसास रह गए हैं।
फिर भी वक़्त बड़ा निर्दयी चित्रकार है। वह सबसे गहरे रंगों को भी धीरे-धीरे धुँधला कर देता है। यादें अंततः स्मृति नहीं रह जातीं, केवल आदत बन जाती हैं।
आख़िर कितनी देर कोई एक ही चक्र में रह सकता है?नदियाँ भी अपने ही पानी में दोबारा नहीं लौटतीं।
शायद जीवन का अर्थ किसी को हमेशा के लिए पा लेना नहीं, बल्कि जब तक वह साथ हो, उसे पूरे वर्तमान के साथ जी लेना है। क्योंकि अंत में हमारे पास लोग,जगहें, वक़्त नहीं बचते उनके साथ जिए हुए क्षण बचते हैं। वही दोपहरें, वही लंबी बातचीतें, वही साथ की ख़ामोशियाँ, जिनमें शब्दों की कभी ज़रूरत ही नहीं पड़ी। वक़्त सबको अपने साथ ले जाता है, पर वर्तमान में पूरी तरह जिया गया एक पल, स्मृति में नहीं, हमारे स्वभाव में बस जाता है। शायद इसी तरह कुछ लोग चले जाने के बाद भी कहीं नहीं जाते। वे हमारे भीतर रहने लगते हैं। हमारी नज़र में, हमारी भाषा में, हमारी ख़ामोशियों में। अंततः जीवन में स्थायी यदि कुछ है, तो वह साथ नहीं, साथ होने का अनुभव है।
दिशा 🌻
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