कुछ परिस्थितियों ने
कुछ कला ने
कुछ ग़लतियों ने
मुझे समस्त बना दिया।
बोलती थोड़ा कम
लिखती थोड़ा ज़्यादा
आत्मज्ञान एहसास ने
मुझे समस्त बना दिया।
ख़ुशियों का आसमान
कठिनाइयों के बादल
असमान विनियमित वक़्त ने
मुझे समस्त बना दिया।
प्रसिद्धि के छिछलेपन ने
आत्ममुग्ध प्रचार कर
आत्मविस्लेषण के अविष्कार ने
मुझे समस्त बना दिया।
चीखती चिल्लाती दुनिया
अकेलेपन का एहसास
सामाजिकता के धंधे ने
मुझे समस्त बना दिया।
सर्वस्व जानने के विवाद में
अंजान अस्थिर सवाल ने
विचलित विवश हृदय से
मुझे समस्त बना दिया!
दिशा 🌻
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