प्रेम तू, परिधान तू।
काँच सा कोमल है,
अखंड सा मशाल तू।
तू उस पार वाला पहाड़,
और बिस्तर का आराम तू।
नंदा,नामचा,नीलगिरी सा विशाल,
और हीरे की ख़ान सा गहरा।
गंगा सा चंचल,
और अलकनंदा सा प्रकान्त तू।
तस्वीरों में सबसे पीछे खड़ा,
और क़द का सर्वस्व विस्तार तू।
जीवन के पहले शब्द सा महत्त्वपूर्ण,
और भीड़ का हर दूसरा चेहरा।
ढूँढे ना मिले वो रहस्य,
और सबसे सरल परिभाषा तू।
हनुमान सा वर्चस्व विकट,
और लव कुश सा तोहफ़ा।
तू खुदी है, तू सदी है।
घड़ी की सेकंड वाली सुई है।
ब्रह्मांड तू,
शब्द, शंकर, शिलान्यास तू।
रोटी का पहला निवाला,
और पेट भर डकार तू।
मैं तू, मुझमें तू, मेरा तू।
तेरा तू नहीं बस,
और सबका शिल्पकार तू।
दिशा 🌻
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