तुम अखंड थे

तुम अखंड थे
थे अमर तुम
मैं मृत्यु थी
मुझे पाना तुम्हारी
कल्पना कोशिश काव्य।

तुम रचयिता थे
सुंदर झूठ तुम
मैं कठोर सत्य
मुझे जानना तुम्हारा
मक़सद मंशा मनोरथ।

तुम उपाय थे
सरल उत्तर तुम
मैं उलझा प्रसंग
हल करना तुम्हारा
समर्पण संयोग स्वार्थ।

तुम समुद्र थे
स्थिर ठहराओ तुम
मैं चंचल नदी
दिशा दिखाना तुम्हारा
धर्म धनाढ्य ध्येय।

दिशा🌻

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