Category: प्रशासन, तुम और मैं

  • अफ़सर बिटिया!

    बधाई हो सिया।
    इतनी बड़ी अफ़सर बन गई
    माँ बाप तो बड़े होंगे खुश
    अरे घर पर भेजती भी हो पैसा कुछ
    कितना बाज़ार जाती हो
    ८-९० झोले तो तुम रोज़ ही लाती हो
    मेकअप तो तुम्हारा पूरा चहचहाहट है
    काम के बीच मिलती तुमको बड़ी फुर्सत है!
    अच्छा बड़ों का पैर अब भी छू पति हो
    या सबपे अपनी अफ़सरी ही चलती हो
    अच्छा सुनो महीने का ऊपर नीचे से सब कितना कमाती हो
    लड़की हो नौकरी में छूट तो होगी ही
    सुंदरता का फ़ायदा मिल जाता होगा यूँ ही
    रात में १२-१ बजे पार्टी पे रोक नहीं है
    भले घर की लड़की के ऐसे तो शौक़ नहीं है
    देखो बेटा बन गई बड़ी मेहनताने
    हम ना करेंगे ट्रिम के शक
    लेकिन बेटा यही नहीं है ज़िंदगी का असली मक़सद
    लड़की अफ़सर तो ज़्यादा परेशानी है
    नौकरी तो बड़ी पर घर की अलग ही कहानी है
    भई लड़की जो भी बने जहां भी पहुँचे
    होती तो वो है माँ बाप पे ज़िम्मेदारी
    कौन सा कलेक्टर बन गई तो शादी मुफ़्त में होगी तुम्हारी?
    अच्छा तुम्हें कोर्ट मैरिज है करनी
    शर्म नहीं आयी ऐसी बेफ़िज़ूल बातें क्यों करनी
    क्या अभी और है पढ़ना
    बेटा दिमाग़ ठीक है थोड़ा सोच के बातें करन
    ३० के पहले शादी करना है घोर घोर ज़रूरी
    बच्चे परिवार में दिक़्क़त होगी नहीं बेफ़ीज़ुली
    पति बच्चे ही अब होने चाहिए तुम्हारे सपने
    सबसे करीबी हम ही तो है तुम्हारे अपने
    फेमिनिज्म के गाने जीतने भी गा लो
    दफ़्तर में अफ़सरी कितनी भी चला लो
    घर में बेटा बड़ों को तुमने ही है बना खिलाना
    अरे तुम हो सुपरवुमन नौकरी घर सब उँगलियों पे सँभालना।
    बेटा बेटी होती है प्यार दिल और समर्पण देने के लिए
    घर का सारा झिग्झिग अपने अंदर समा लेने के लिए
    इतने मेहनत से तुम्हें पढ़ाया लिखाया अफ़सर बनाया
    अब जल्दी से शादी और बच्चे कर के भर दो किराया।

    दिशा🌻