
विष अमृत
देखो,वो भागती हुई छोटी बच्ची बड़ी आकर्षक लग रही है अपनी मोटी सी चोटी में उसने विष अमृत के खेल को बांध रखा है।झरोखे से ये मंज़र बेहद दिलचस्प लग रहा था,उसके पीछे भागती टोली और उसका घेराव। कितनी मनमोहक है ये लड़की। गुलमोहर से ज़्यादा रंगीन और बदल से ज़्यादा सफ़ेद।
शिवानी ५ बज गये हैं, मैंने चाय बनाई है।दिन का मेरा सबसे खूबसूरत पल यही तो है।और तुम्हें मुझसे ज़्यादा विष अमृत के खेल में दिलचस्पी है!
रिज़वान पता है तुम्हें, मुझे आगे ही आगे देखने का मन है,कितनी जितनी उतनी दूर देख सकूँ।ये बच्चों की टोली में अमूल्य आत्मीयता है।मुझे भी ऐसे ही दोस्त बनाने हैं। मेरे गिर जाने पे जो खेल ही रोक दें।ये देखो बाहर एक घंटी की तीखी टन टन की आवाज़,वो गोलगप्पे वाला १० के ६,१० के ६ चिल्ला रहा है।
हाँ और रोज़ की तरह तुम्हारी वो छोटी बच्ची सबसे पहले भागी होगी।वो गोलगप्पे खा रही है और हम पता नहीं क्यों बैठ के उसे देख रह हैं।
रिज़वान देखो ना जाने क्यों उस छोटी बच्ची ने एक प्लेट गोलगप्पे रबर में अच्छे से बँधवा के रख लिया है।अब खेलने जा रही है वापिस।
शिवानी,यार चाय ठंडी हो रही है।कब तक निहारोगी वही बेमौसम गुलमोहर और अपनी उस छोटी बच्ची को?हमारे साथ बैठो, आज शाम दिल्ली भी निकलना है ना?पैकिंग तुमने कुछ की नहीं होगी!साड़ियाँ बांध लीं या १०० साड़ियों की अलमारी में एक भी साड़ी नहीं है तुम्हारे पास!
मुझे विश अमृत खेलना है।
क्या?
हाँ।मैं नीचे जा रही हूँ।
क्या पागलपन है ये। अरे अपने बाल तो बांधती जाओ।
दिशा🌻