
गुमनाम
आप एकाग्र कम रहती हैं ना?
नहीं तो।आप ऐसा क्यों बोल रहे हैं?
वो आज वर्ल्ड हिस्ट्री की क्लास में आप रह रह के शून्य में देखने लग रही थी ना।जैसे हिटलर को हराने की कोई नयी तरकीब सोच रही हों।
आप मुझे कुछ ज़्यादा ही गौर नहीं कर रहे?
बग़ल में रोल नो है आपके।मैं जान बूझ के नहीं कर रहा था कुछ।
हाहा।अभी एक महीना ही हुआ है क़रोल बाघ आये। एकाग्रता तो सीख ही रही हूँ अभी।
सिविल सेवा परीक्षा,त्यागी ज़िंदगी के सबसे महत्वपूर्ण पाठ आसानी से सिखा देती है। आप निश्चिंत रहिए। बस बहते जाइए।
बहने के लिए नदियों का रुख़ जानना पड़ेगा। मुझसे तो यहाँ की गलियाँ ही नहीं पढ़ी जाती!
अरे तो पानी के साथ हो लीजिये। हर एक गली आपको आपकी मंज़िल तक ज़रूर पहुँचायेगी।
आप परिपक्व लग रहे हैं।कितना वक़्त हो गया यहाँ?
घड़ी तो मैंने २ साल पहले ही देखना बंद कर दिया था।लास्ट टाइम इंटरव्यू के टाइम ही कलाई घुमायी थी और आँखें सुइयों की तरफ़ पड़ी थी। तबसे उसी वक़्त का इंतज़ार आँखों में लिए वक़्त कट रहा है।
हिन्दी साहित्य ऑप्शनल है ना आपका?
हाहा नहीं फिजिक्स।
मुझे डर लग रहा है।मुझसे नहीं होगा।पता नहीं आपसे क्यों बता रही मैं ये। मैं तो आपका नाम तक नहीं जानती।
अरे। हम सब एक ही दर्द के मारे हैं। अपने नाम से ज़्यादा यहाँ कोचिंग और रैंक से हम सब जाने जाते हैं। और डर लगना तो लाज़मी है।उसके बिना कहाँ ही कुछ संभव हुआ है आज तक।अपने डर को मोनेटाइज़ नहीं होने देना है बस। जितना डर आपको लगेगा ख़रीदार उतने ही बढ़ते जाएँगे। कोई आपको यहाँ A B C D लिखना सिखाने लगेगा तो कोई पेपर पढ़ना।आप बस अपना डर ख़ुद सम्भालियेगा।सब कुछ आपके अंदर ही है। डर,हार,जीत,सफलता,असफलता सब आप ही है।
आपको ऑप्शनल बदलने का सोचना चाहिए वैसे।
हाहा। अरे इस बार बहुत उम्मीदें हैं। फिजिक्स ही पार लगाएगा।
समझी।
अच्छा इतना बोल दिया है तो एक मुफ़्त कि सलाह और मार देता हूँ।
जी ज़रूर।
हमेशा पोहे में प्याज़ ऊपर से डलवाइयेगा, चाय ठेले से ही पीजियेगा,बहुत कम लोगों से बात करियेगा और अंदर ही अंदर रोज़ डरियेगा, हर दिन। ये डर ख़त्म नहीं होना चाहिए और किसी को पता भी नहीं चलना चाहिए।
धन्यवाद। शायद मुझे इसी की ज़रूरत थी।
अरे एकदम। एकदम।गुडबाय।
सुनिए,आपका नाम?
परसों तक शायद रिजल्ट आ रहा है। आशा करता हूँ उसमें नाम मिल जाये आपको। और अगर नहीं मिला तो यहीं टेस्ट सेंटर पे मिलूँगा।पूछ लीजियेगा।
दिशा🌻